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028 _a: Zafaa Books & Distributors
_b: 313/56F, 49A, Anand Nagar, Inderlok, Delhi
_c: ZBD0226
_d: 3/11/2023
082 _a891.43 PAN
100 _aPandita, Rahul.
245 _aMeri Maa Ke Baees Kamre
_b: Kashmiri Pandito Ke Palayan Ki Kaljayi Katha.
_c/ Rahul Pandita.
260 _a, Delhi
_b: Prabhat Prakashan
_c,2023.
300 _a216p.
_c;24cm.
365 _b250
520 _aराहुल पंडिता जब महज 14 वर्ष के थे तो उन्हें अपने परिवार सहित श्रीनगर से पलायन करना पड़ा था। वे मुस्लिम बहुल कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के कश्मीरी पंडित थे, जहाँ अस्सी के दशक के आखिर में भारत से 'आजादी' को लेकर लगातार उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। 'मेरी माँ के बाईस कमरे' कश्मीर के दिल से निकली वह कहानी है, जिसमें इस्लामी उग्रवाद के कारण लाखों कश्मीरी पंडितों के उत्पीडऩ, हत्याओं और पलायन का दर्द छुपा है। यह एक ऐसी आपबीती है, जिसमें एक पूरा समुदाय बेघरबार होकर अपने ही देश में निर्वासितों का जीवन जीने को मजबूर हो जाता है। राहुल पंडिता की यह कहानी झकझोर कर रख देनेवाली है और इसे बार-बार कहा जाना जरूरी है, ताकि हम इतिहास से सबक ले सकें।
650 _aFiction
650 _aHindi Fiction
650 _aKaljayi Katha.
700 _aRahul Pandita
942 _cBOOK
999 _c61215
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