| 000 | 04085nam a22002297a 4500 | ||
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| 028 |
_a: Technical Bureau _b: 4794/23, 1st Floor, Ansari Road, Daryaganj, New Delhi _c: TB3471 _d: 11/2/2026 |
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| 082 | _a890 SUN | ||
| 100 | _aSundar, Nandini. | ||
| 245 |
_aDavanal _b: Maovad Se Jung. _c/ Nandini Sundar. |
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| 260 |
_a, New Delhi _b: Rajkamal Prakashan _c, 2022. |
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| 300 |
_a358p. _c: 16cm. |
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| 365 | _b349 | ||
| 520 | _aपिछले दो दशकों के दौरान, मध्य भारत में व्यापक रूप से वनों से आच्छादित और खनिज के मामले में समृद्ध बस्तर का इलाका देश में सबसे अधिक सैन्यीकृत स्थलों में से एक के रूप में उभरा है। सरकार माओवादी उग्रवाद को भारत की ‘सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा’ बताती है। वर्ष 2005 में राज्य-प्रायोजित एक हथियारबन्द आन्दोलन, सलवा जुडुम, ने सैकड़ों गाँवों को जला दिया और मलेशिया, वियतनाम एवं अन्य जगहों पर विकसित आतंकवाद-विरोधी रवैये का अनुसरण करते हुए उन गाँवों के निवासियों को राज्य-नियंत्रित शिविरों में हाँक दिया। बलात्कार और हत्याओं के अलावा, ‘आत्मसमर्पण’ कर चुके सैकड़ों माओवादी समर्थकों को जबरन सहायक के रूप में भरती किया गया। संघर्ष आज भी जारी है, जो आम नागरिकों, सुरक्षा बलों और माओवादी कैडरों के जीवन पर भारी पड़ रहा है। वर्ष 2007 में, नन्दिनी सुन्दर एवं अन्य लोगों ने इस संघर्ष से उत्पन्न मानवाधिकार-हनन के मुद्दे पर भारत सरकार को सर्वोच्च न्यायालय में घसीटा। वर्ष 2011 में दिए गए एक ऐतिहासिक फ़ैसले में, न्यायालय ने हथियारबन्द गिरोह के लिए राज्य के समर्थन पर प्रतिबन्ध लगा दिया। हालाँकि, सरकार ने इस फैसले को लागू नहीं किया है। ‘दावानल : माओवाद से जंग’ पुस्तक भारत के हृदयस्थल में चल रहे इस क्रूर युद्ध का वर्णन करती है और देश की अदालतों, मीडिया, राजनीति और अन्त में भारतीय लोकतंत्र की हकीकत बयान करती है। यह इलाके की व्यापक यात्राओं, अदालती साक्ष्यों, सरकारी दस्तावेजों और उन घटनाओं में एक सक्रिय भागीदार की भूमिका पर आधारित है। | ||
| 650 | _aHindi Fiction | ||
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| 650 | _aMaovad Se Jung | ||
| 700 | _aNandini Sundar. | ||
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