| 000 | 02821nam a22002297a 4500 | ||
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| 020 | _a9789355185846 | ||
| 028 |
_a: Technical Bureau India Pvt. Ltd. _b: 4794/23, 1st Floor, Ansari Road, Daryaganj, New Delhi _c: TB2197 _d: 30/09/2026 |
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| 082 | _a891.433 RUP | ||
| 100 | _aRupda, Manoj. | ||
| 245 |
_aKaale adhyaay _c/ Manoj Rupda. |
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| 260 |
_aN.Delhi _b : Bharatiya Jnanpith _c , 2015. |
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| 300 |
_a179 p. _c: 16cm. |
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| 365 | _b276 | ||
| 520 | _aकाले अध्याय - मनोज रूपड़ा समकालीन कहानी के विशिष्ट हस्ताक्षर हैं। उनमें कहानी कहने की अपूर्व क्षमता है। काले अध्याय में उनके जीवन के संस्मरण हैं, जिसे उन्होंने बचपन से लेकर हमउम्र की छोटी-छोटी घटनाओं को बारीकी से सहेजा है। कहानी से इतर जो वे कह नहीं पाये हैं, उसकी यहाँ जीवन्त और सशक्त अभिव्यक्ति है। मगर यहाँ भी कथा का ही विस्तार है, जहाँ उनकी चेतना अपने तई भीतर-बाहर से जुड़कर एक अनूठा कथा-संसार रचती है। मनोज रूपड़ा बेचैन कथाकार हैं और यह बेचैनी यहाँ भी देखी जा सकती हैं। उनके कथा सूत्र सामान्य जीवन के हैं मगर इतने सघन और गहरे हैं कि उन पर एक बड़ा कैनवास बुनते हैं और जीवन-विस्तार में ठहरे हुए पलों को एक बेहतरीन लिबास देते हैं। काले अध्याय उज्ज्वलतर जीवन का उघड़ा हुआ सच है, जो पाठक के भीतर सर्जनात्मकता की लहर सी पैदा करता है। निःसन्देह यह एक पठनीय कृति बन पड़ी है, जहाँ इकहरे जीवन से मुक्ति का सीधा सरल रास्ता अख्तियार नहीं करती। | ||
| 650 | _aHindi Collection | ||
| 650 | _aNovel | ||
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| 700 | _aManoj Rupda. | ||
| 942 | _cBOOK | ||
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