Massavaat Ki Jang. (Record no. 61150)

MARC details
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005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION
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008 - FIXED-LENGTH DATA ELEMENTS--GENERAL INFORMATION
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020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER
International Standard Book Number 9789350724934
028 ## - DISTRIBUTOR NAME
Distributor Name : Zafaa Books & Distributors
Distributor address : 313/56F, 49A, Anand Nagar, Inderlok, Delhi.
Bill Number : ZBD0222
Bill Date : 02/11/2023
082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER
Classification number 914.54 ANW
100 ## - MAIN ENTRY--PERSONAL NAME
Personal name Anwar, Ali.
245 ## - TITLE STATEMENT
Title Massavaat Ki Jang.
Statement of responsibility, etc / Ali Anwar.
260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT)
Place of publication, distribution, etc , New Delhi
Name of publisher, distributor, etc : Vani Prakashan
Date of publication, distribution, etc ,2021.
300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION
Extent 263p.
Dimensions : 24cm.
365 ## - TRADE PRICE
Price amount 395
520 ## - SUMMARY, ETC.
Summary, etc भारत में सामाजिक न्याय की अवधारणा अब भी कितनी अधूरी है, यह जानने के लिए इस शोध कृति को पढ़ना ज़रूरी है। आम तौर पर माना जाता है कि जाति व्यवस्था हिन्दू समाज में ही है और मुसलमान इस सामाजिक बुराई से मुक्त हैं। मंडल आयोग ने इस मिथक को पहली बार तोड़ा - पिछड़ी जातियों की उसकी सूची में मुसलमान भी थे। पिछड़ी जातियों के इन मुसलमानों को तो आरक्षण मिल गया लेकिन एक और मिथक टूटने की प्रतीक्षा कर रहा था जिसके अनुसार दलित वर्ग सिर्फ हिन्दू समाज का कलंक है। दरअसल हुआ यह है कि भारत में आकर इस्लाम ने भी अपना भारतीयकरण कर लिया, जिसके नतीजे में उसने हिन्दू समाज की अनेक बुराइयाँ अपना लीं। अन्यथा यहाँ के मुस्लिम समाज में हलालखोर, लालनेगी, भटियारा, गोरकन, बक्खो, मीरशिकार, चिक, रंगरेज नट आदि दलित जातियाँ न होतीं। इनका दोहरा अभिशाप यह है कि हिन्दू इन्हें मुसलमान मानते हैं और इनके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं; दूसरी तरफ मुसलमान इन्हें अपने सामाजिक सोपानक्रम में सबसे नीचे रखते हैं और इनके साथ दलितों जैसा सलूक करते हैं। भारतीय संविधान ने भी इनके साथ कम मज़ाक नहीं किया है। अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है, पर इन जातियों की सूची में दलित मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है। भारत के पहले प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने बिहार प्रान्तीय जमावत-उल-मोमिनीन के अब्दुल कयूम अंसारी को सम्बोधित 14 नवम्बर, 1939 के अपने पत्र में स्वीकार किया था कि उच्च वर्ग के मुसलमानों ने सभी सुविधाओं पर एकाधिकार स्थापित कर लिया है, अतः मोमिनों के विकास के लिए विशेष प्रयास किये जाने चाहिए, जिनमें सीटों का आरक्षण भी शामिल है। लेकिन आज़ादी के पाँच दशक बाद भी दलित मुसलमानों को न्याय नहीं मिल पाया है वास्तविकता तो यह है कि उनके परम्परागत पेशे उजड़ जाने के कारण उनकी हालत और बदतर ही हुई है। इसी से उनकी राजनीति भी जन्म ले रही है : वे समझ गये थे कि न दलित संगठन उन्हें अपना सकेंगे न ऊँची जातियों के मुसलमान उन्हें पूरे धार्मिक और सामाजिक अधिकार दे सकते हैं। शोषित, दलित और वंचित वर्गों के इस उषा काल में अली अनवर का यह मूल्यवान अध्ययन भारत की राजनीतिक संरचना के बारे में नयी अन्तर्दृष्टि देता है और जाति तथा वर्ग की विषमताओं से संघर्ष की रणनीति में कुछ ज़रूरी संशोधन प्रस्तावित करता है ।
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical term or geographic name as entry element Bihar
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical term or geographic name as entry element Bihar History
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical term or geographic name as entry element Moshlim of Bihar
700 ## - ADDED ENTRY--PERSONAL NAME
Personal name Ali Anwar
942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA)
Koha item type Books
Holdings
Withdrawn status Lost status Source of classification or shelving scheme Damaged status Not for loan Home library Current library Date acquired Source of acquisition Cost, normal purchase price Total Checkouts Full call number Barcode Date last seen Price effective from Koha item type Public note
    Dewey Decimal Classification     SNU LIBRARY SNU LIBRARY 09/11/2023 Zafaa Books 395.00   914.54 ANW 29680 09/11/2023 09/11/2023 Books Rural Management

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