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Tendulkar ki Kahani; Unhin ki Zubani /Sachin Tendulkar.

By: Contributor(s): Material type: TextTextPublisher number: : Zafaa Books & Distributors | : 313/56F, 49A, Anand Nagar, Inderlok, Delhi.Publication details: ,New Delhi :Prabhat Prakashan ,2019.Description: 238p. :22cmISBN:
  • 9789353226671
Subject(s): DDC classification:
  • 796.358 TEN
Summary: मेरे पिता ने मुझे 11 साल की उम्र में ही आजाद पंछी की तरह छोड़ दिया और मुझसे बोले; ‘‘अपने सपनों का पीछा करो; लेकिन यह शर्त है कि तुम उनको पाने के लिए शॉर्टकट नहीं ढूँढ़ोगे।’’ अपने 24 साल के लंबे कॅरियर के दौरान शायद ही ऐसा कोई क्रिकेट रिकॉर्ड होगा; जो सचिन तेंदुलकर से अछूता रहा हो। टेस्ट और एक दिवसीय मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने के अलावा वे पहले और एकमात्र ऐसे बल्लेबाज बने; जिसने 100 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाए और 200 टेस्ट मैचों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी स्ट्रोक खेलने की विशिष्ट शैली ने उनको ऐतिहासिक हस्ती बना दिया; क्योंकि यह उनकी ही विलक्षण क्षमता थी कि वह दुनिया के किसी भी हिस्से में और मैदान के किसी भी कोने पर गेंद मार सकते थे। बंबई में एक मध्यवर्गीय परिवार में जनमे सचिन ने; जो कि एक शरारती बच्चे थे; बड़े हुए तो दिखाया—एक खिलाड़ी और कप्तान के रूप में कैसे लक्ष्यों को हासिल किया जाता है और कैसे सपनों को सच किया जाता है! हैरत की बात नहीं; खेल के प्रति उनका जुनून; देश के लिए उनके मन में सम्मान और मैदान एवं उससे बाहर उनका शानदार व्यवहार ही वे बातें रहीं; जिन्होंने उनको करोड़ों लोगों का चहेता और आनेवाली पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बनाया था। सचिन तेंदुलकर के शिखर को छूने की रोचक और प्रेरणाप्रद यात्रा; उन्हीं की जुबानी। यह पुस्तक न केवल पठनीय है; वरन् असंख्य युवाओं और खेल-प्रेमियों के लिए प्रेरणा का खजाना है।
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Children Books Collection Children Books Collection SNU LIBRARY 796.358 TEN (Browse shelf(Opens below)) Not For Loan 29567
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मेरे पिता ने मुझे 11 साल की उम्र में ही आजाद पंछी की तरह छोड़ दिया और मुझसे बोले; ‘‘अपने सपनों का पीछा करो; लेकिन यह शर्त है कि तुम उनको पाने के लिए शॉर्टकट नहीं ढूँढ़ोगे।’’
अपने 24 साल के लंबे कॅरियर के दौरान शायद ही ऐसा कोई क्रिकेट रिकॉर्ड होगा; जो सचिन तेंदुलकर से अछूता रहा हो। टेस्ट और एक दिवसीय मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने के अलावा वे पहले और एकमात्र ऐसे बल्लेबाज बने; जिसने 100 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाए और 200 टेस्ट मैचों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। उनकी स्ट्रोक खेलने की विशिष्ट शैली ने उनको ऐतिहासिक हस्ती बना दिया; क्योंकि यह उनकी ही विलक्षण क्षमता थी कि वह दुनिया के किसी भी हिस्से में और मैदान के किसी भी कोने पर गेंद मार सकते थे।
बंबई में एक मध्यवर्गीय परिवार में जनमे सचिन ने; जो कि एक शरारती बच्चे थे; बड़े हुए तो दिखाया—एक खिलाड़ी और कप्तान के रूप में कैसे लक्ष्यों को हासिल किया जाता है और कैसे सपनों को सच किया जाता है! हैरत की बात नहीं; खेल के प्रति उनका जुनून; देश के लिए उनके मन में सम्मान और मैदान एवं उससे बाहर उनका शानदार व्यवहार ही वे बातें रहीं; जिन्होंने उनको करोड़ों लोगों का चहेता और आनेवाली पीढ़ी के लिए रोल मॉडल बनाया था।
सचिन तेंदुलकर के शिखर को छूने की रोचक और प्रेरणाप्रद यात्रा; उन्हीं की जुबानी। यह पुस्तक न केवल पठनीय है; वरन् असंख्य युवाओं और खेल-प्रेमियों के लिए प्रेरणा का खजाना है।

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