Amazon cover image
Image from Amazon.com
Image from Google Jackets

The Jannayak Karpoori Thakur Hindi / Santosh Singh.

By: Contributor(s): Material type: TextTextPublisher number: : Raghav Books Private Limited | : 2/25, First Floor Arun House, Ansari Road, Darya Ganj, New DelhiPublication details: , Gurugram : Penguin Swadesh , 2025.Description: xlvi, 360p. : 18cmISBN:
  • 9780143466673
Subject(s): DDC classification:
  • 954.035 SIN
Summary: कर्पूरी ठाकुर, जिन्हें अकसर जननायक कहा जाता है, बिहार के एक दिग्गज नेता थे, जिनका भारतीय राजनीति पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव था। वर्ष 2024 की शुरुआत में, समाज में उनके असाधारण योगदान के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में, यह जीवनी ठाकुर के जीवन, विरासत और स्थायी प्रासंगिकता को प्रकाश में लाती है। यह उनकी राजनीति पर केंद्रित है, जिसने ‘कोटा विदिन कोटा’ की शुरुआत की और 1978 में पिछड़े वर्गों और महिलाओं के बीच आरक्षण को विभाजित करने में उनकी भूमिका की झलक दिखाती है। गहन शोध पर आधारित, रोचक और अविस्मरणीय। कर्पूरी ठाकुर भारतीय राजनीति और समाज के जटिल परिदृश्य को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए एक प्रकाश-स्तंभ साबित होने का वादा करती है।
Tags from this library: No tags from this library for this title. Log in to add tags.
Star ratings
    Average rating: 0.0 (0 votes)
Holdings
Item type Current library Call number Status Barcode
Books Books SNU LIBRARY 954.035 SIN (Browse shelf(Opens below)) Not For Loan 31500
Total holds: 0

कर्पूरी ठाकुर, जिन्हें अकसर जननायक कहा जाता है, बिहार के एक दिग्गज नेता थे, जिनका भारतीय राजनीति पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव था। वर्ष 2024 की शुरुआत में, समाज में उनके असाधारण योगदान के सम्मान में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में, यह जीवनी ठाकुर के जीवन, विरासत और स्थायी प्रासंगिकता को प्रकाश में लाती है। यह उनकी राजनीति पर केंद्रित है, जिसने ‘कोटा विदिन कोटा’ की शुरुआत की और 1978 में पिछड़े वर्गों और महिलाओं के बीच आरक्षण को विभाजित करने में उनकी भूमिका की झलक दिखाती है।
गहन शोध पर आधारित, रोचक और अविस्मरणीय। कर्पूरी ठाकुर भारतीय राजनीति और समाज के जटिल परिदृश्य को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए एक प्रकाश-स्तंभ साबित होने का वादा करती है।

There are no comments on this title.

to post a comment.
Share

© Copyright Shiv Nadar University 2012. All Rights Reserved.  Disclaimer |  Sitemap
The Shiv Nadar University has been established under U.P. Act No 12 of 2011. Shiv Nadar University is UGC Approved.